1958 में बंबई में नीरज का एकल काव्य पाठ हुआ. वहां उनकी कविता से फिल्म निर्माता आर चंद्रा उनसे खासे प्रभावित हुए. चंद्रा एटा के पास अलीगढ़ से ही थे. चंद्रा ने नौजवान नीरज से कहा कि फिल्मों में काम करोगे. गरीब नीरज ने कहा, मैं नौकरी से बंधा आदमी हूं, यहां नहीं आ सकता. आप चाहो तो मेरी कविताएं ले लो. आर चंद्रा ने पूरी की पूरी “नई उम्र की नई फसल” फिल्म ही नीरज के गीतों के इर्द गिर्द रच डाली.
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